- अपना लक्ष्य निर्धारित करें- निवेशक को सर्व प्रथम अपना लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक होता है. यह एक अनुमानित राशि हो सकती है किसी समयांतराल विशेष के लिए या फिर सालाना निवेश का लक्ष्य हो सकता है. यथा- "अ" का लक्ष्य दस वर्षों में बीस लाख रूपये है जबकि "ब" का लक्ष्य दस वर्षों तक सालाना एक लाख रूपये निवेश करने का है.
- अपनी जोखिम क्षमता को पहचाने- निवेश के कई साधन हैं. कुछ में ज्यादा लाभ की संभावनाएं हैं तो उनमे जोखिम भी अधिक है यथा- शेयर बाजार तथा इक्विटी म्युचुअल फंड, कुछ साधनों में जोखिम नगण्य है तो वहाँ रिटर्न भी कम होता है. अतः निवेश का बटवारा उचित स्वरुप में होना चाहिए जिससे सामान्य से अधिक रिटर्न प्राप्त किया जा सके. इस हेतु अपने जोखिम क्षमता को पहचानने की आवश्यकता होती है.
- जोखिम क्षमता के अनुरूप पोर्टफोलियो का निर्माण करें- जोखिम के आधार पर निवेशकों को तीन भागों में बांटा जा सकता है- क. एग्रेसिव ख.मोडरेट ग.कंजर्वेटिव. एग्रेसिव या आक्रामक निवेशक ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता रखता है जिस कारण उसके निवेश पर अधिक रिटर्न की उम्मीद होती है जबकि मोडरेट या माध्यम जोखिम का निवेशक अपने निवेश का कुछ हिस्सा जोखिम युक्त निवेश में लगता है तो कुछ सुरक्षित निवेश के साधनों में. वहीँ कंजर्वेटिव निवेशक अपना पूरा निवेश जोखिम रहित साधनों में करते है अतएव उनके निवेश पर रिटर्न भी न्यूनतम होता है.
- नियमित रूप से निवेश करें- अब अपनी योजना एवं पोर्टफोलियो के अनुरूप नियमित एवं सुनियोजित रूप से निवेश करें.
मैं कोई प्रोफेशनल एक्सपर्ट नहीं परन्तु एक निवेशक अवश्य हूँ जो अधिक से अधिक सीखना चाहता है- अपने अनुभवों से और अपने प्रयासों से.
05 December, 2010
योजनाबद्ध निवेश करें
किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक करने के लिए उचित योजना के निर्माण की आवश्यकता होती है. निवेश की प्रक्रिया में भी योजना का महत्वपूर्ण स्थान है. यदि मेहनत की कमाई से किये जा रहे निवेश को योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया तो उससे या तो अपेक्षित लाभ नहीं लिया जा सकता या फिर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. अतएव निवेश से पहले उसकी योजना बनाएँ फिर उसी के अनुसार आगे बढे.
01 December, 2010
निवेश: क्या, क्यों, कब और कहाँ?
१. निवेश क्या है?
जहाँ तक मैं समझाता हूँ, निवेश कुल आय से व्यय के उपरांत बची हुई राशि का इस प्रकार से उपयोग है कि समय के साथ इससे कुछ लाभ प्राप्त हो सके.
२.निवेश क्यों करें?
प्रत्येक व्यक्ति की कुछ आय होती है. उसमें से वह अपनी आवश्यकताओं कि पूर्ति हेतू व्यय करता है. जो शेष राशि बच जाती है वह उसकी बचत कहलाती है. इस बचत को सुरक्षित रखने का सरल उपाय उसे किसी बक्से में रख देना या घड़े में डालकर जमीं के निचे दबा देना हो सकता है, परन्तु समय के साथ बढ़ रही महंगाई दर के साथ उसके बचत का मूल्य नहीं बढेगा. इसलिए महंगाई के साथ बचत को अवमूल्यन से बचाने के लिए निवेश आवश्यक है.
३.निवेश कब करें?
मेरा मानना है "जब जागो तभी सबेरा" अर्थात निवेश कभी भी किया जा सकता है. व्यय के उपरांत जो राशि बचे उसको निवेश के जरिये अवमूल्यन से बचाया जा सकता है.
४.निवेश कहाँ करें?
वर्तमान समय में निवेश के कई साधन हमारे समक्ष मौजूद हैं, यथा- बैंक, पोस्ट-ऑफिस, जीवन बीमा, शेयर बाजार, म्युचुअल फंड, बांड, रियलिटी इत्यादि. व्यक्ति को अपनी जोखिम क्षमता एवं समय के अनुरूप निवेश माध्यमों का चयन करना चाहिए.
जहाँ तक मैं समझाता हूँ, निवेश कुल आय से व्यय के उपरांत बची हुई राशि का इस प्रकार से उपयोग है कि समय के साथ इससे कुछ लाभ प्राप्त हो सके.
२.निवेश क्यों करें?
प्रत्येक व्यक्ति की कुछ आय होती है. उसमें से वह अपनी आवश्यकताओं कि पूर्ति हेतू व्यय करता है. जो शेष राशि बच जाती है वह उसकी बचत कहलाती है. इस बचत को सुरक्षित रखने का सरल उपाय उसे किसी बक्से में रख देना या घड़े में डालकर जमीं के निचे दबा देना हो सकता है, परन्तु समय के साथ बढ़ रही महंगाई दर के साथ उसके बचत का मूल्य नहीं बढेगा. इसलिए महंगाई के साथ बचत को अवमूल्यन से बचाने के लिए निवेश आवश्यक है.
३.निवेश कब करें?
मेरा मानना है "जब जागो तभी सबेरा" अर्थात निवेश कभी भी किया जा सकता है. व्यय के उपरांत जो राशि बचे उसको निवेश के जरिये अवमूल्यन से बचाया जा सकता है.
४.निवेश कहाँ करें?
वर्तमान समय में निवेश के कई साधन हमारे समक्ष मौजूद हैं, यथा- बैंक, पोस्ट-ऑफिस, जीवन बीमा, शेयर बाजार, म्युचुअल फंड, बांड, रियलिटी इत्यादि. व्यक्ति को अपनी जोखिम क्षमता एवं समय के अनुरूप निवेश माध्यमों का चयन करना चाहिए.
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